What is special in ISRO Mission Chandrayaan-2 in Hindi

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क्या है अलग इस बार ISRO का मिशन Chandrayaan-2 में

What special and new in Chandrayaan-2 / ISRO mission

 

21 July को पूरे 50 साल हो गए जब पहली बारग  नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर कदम रखा और आज 22 July 2019 को ISRO ने अपना chandrayaan-2 लॉन्च कर दिया है|

Chandrayaan-2 से जुड़ी 3 खास बातें

1- क्या है नया इस Chandrayaan-2 में?
2- क्यों इंपॉर्टेंट है यह हमारे देश के लिए?
3- क्यों लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं?

अगर हम Mission Mangal यानी Chandrayaan-1 की बात करें तो यह ISRO के द्वारा बनाया गया यह ऐसा मिशन था जो चंद्रमा का चक्कर काटते हुए सारी जानकारी निकालता था|

इस बार हम चंद्रमा कि सतह पर जाकर प्रक्रमण करेंगे और चांद की जमीनी जानकारी हासिल करेंगे इस Chandrayaan-2 मिशन का सबसे बड़ा लक्ष्य यह पता लगाना है कि चांद पर कितनी मात्रा में पानी मौजूद है|

अगर हम चांद की सतह की बात करें जब सूरज की रोशनी उस पर पड़ती है तब चंद्रमा की सतह का टेंपरेचर 125° रहता है और दूसरी साइट जहां पर सूरज की रोशनी नहीं पड़ती वहां का टेंपरेचर लगभग -175° होता है|

इसका सीधा सा मतलब यह है कि चांद पर क्विड के सामने पानी का होना बिल्कुल नामुमकिन है ऐसे टेंपरेचर पर पानी हो ही नहीं सकता|

Moon craters are showing possibility of water in moon surface , Chandrayaan-2 ISRO

 

लेकिन 1960’s में वैज्ञानिकों का मानना है की चांद पर जो गड्ढे दिखते हैं वहां पर पानी का होना मुमकिन है क्योंकि चांद की रोशनी उन गड्ढों के अंदर नहीं पहुंचती जिसकी वजह से वहां का तापमान पानी के होने के लिए बिल्कुल सही है|

क्या है खास Chandrayaan-2 में

इस Chandrayaan-2 के 3 पार्ट है|

1- ऑर्बिटल

GSLV रॉकेट इतना पावरफुल नहीं है कि यह Chandrayaan-2 को चांद तक ले जा सके इसी वजह से ISRO ने दिमाग लगाया और पृथ्वी की ग्रेविटेशनल फोर्स का इस्तेमाल किया और इस रॉकेट को इतनी दूरी तक ले जा कर छोड़ा कि रॉकेट से इसका दूसरा पार्ट निकलेगा जो ऑर्बिटल तक जाएगा वह पृथ्वी से ग्रेविटीशनल फोर्स लेकर चक्कर काटते हुए चांद तक पहुंचेगा और चांद की ऑर्बिट में चक्कर लगाएगा|

2- लेंडर (जो रोवर को चांद पर लैंड कराएगा)

इस लेंडर का नाम ISRO के पिता विक्रम साराभाई पर रखा गया है उनके सम्मान में, यह लेंडर अपने अंदर रखे रोवर को सही सलामत चांद पर उतारेगा|

3- रोवर (प्रज्ञान)

यह हमारी अहम वैज्ञानिक मशीन है जो कि चांद की सतह का मुआयना करेगी और महत्त्वपूर्ण डाटा को पृथ्वी पर भेजेगी यह प्रज्ञान रोवर 27kg का है और यह अपने से 50W तक पावर जनरेट कर सकता है|

क्यों महत्त्वपूर्ण है या मिशन हमारे लिए

यह मिशन 2008 में अप्रूव हुआ था और 2009 तक सारी तैयारी हो गई थी इस मिशन को दो देश मिलकर बनाने वाला था पहले तो हमारे भारत की स्पेस एजेंसी ISRO और दूसरा रूस की स्पेस एजेंसी दोनों मिलकर काम करने वाले थे|

रूसी स्पेस एजेंसी लैंडर की डिजाइन करती और बाकी सारा काम भारत की स्पेस एजेंसी ISRO करती लेकिन रूस ने इतने डिले किए कि उसने 2015 तक इस डेट को आगे बढ़ा दिया इसके बावजूद वह लेंडर बना नहीं पाए, इसी वजह से इंडिया की स्पेस एजेंसी ISRO ने सारा काम खुद से करने का फैसला लिया और सब कुछ खुद ही डिजाइन और बनाने का जिम्मा लिया|

इस Chandrayaan-2 मिशन का मेन मकसद है चांद पर पानी ढूंढना और वहां की सतह का 3D मैप बनाकर एनालाइज करना|

अगर यह मिशन पूरी तरीके से सफल हो जाता है तो जब भी कोई एस्ट्रोनॉट चांद पर जाएगा तो उसको पानी आसानी से मिलेगा|

NASA 2024 तक चांद पर कॉलोनी बसाना चाहती है उसके लिए भी यह जानकारी काफी महत्वपूर्ण होने वाली है|

लोगों ने इस मिशन पर जो सवाल उठाएं

बहुत से लोगों ने इस मिशन पर आपत्ति जताई। उनका कहना यह था कि हमारे देश में सड़कों पर इतने गड्ढे हैं और बेरोजगारी गडर दिन ब दिन गिरता जा रहा है ऐसे में 1000 करोड़ रुपया खर्च करके इस मिशन को करने की क्या जरूरत|

लोगों ने कहा कि अगर हमें चांद पर पानी मिल भी जाता है तो यह हमारे लिए क्या फायदा होगा और चांद से भी कोइ जानकारी हमारे किस काम आने वाली है|

लोगों का कहना था कि यह 1000 करोड़ जो ISRO Chandrayaan-2 मिशन में लगाए गए हैं उनको हमारी अर्थव्यवस्था सुधारने में लगाना चाहिए था जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और अच्छी हो और लोगों को रोजगार मिले|

हम आपको बता दें यह 1000 करोड़ इस Chandrayaan-2 में कोई वेस्ट नहीं होने वाले है। सीधी भाषा में अगर हम समझे तो जो हमारे मौसम की प्रेडिक्शन करते हैं उनकी वजह से सुनामी और बहुत से बड़े खतरो का पहले ही पता चल जाता है जिससे हजारों लाखों का नुकसान होने से बचाया जा सकता है|

इसी तरह यह Chandrayaan-2 मिशन जो जानकारी हासिल करेगा कुछ जानकारी के हमें बहुत से पैसे मिलेंगे और हमारे भारत की अर्थव्यवस्था और बुसट लेगी जिससे यहां पर नई नई नौकरियां और साइंस में तरक्की होगी|

ISRO का “मंगलयान” मिशन दिसंबर 2021 को लांच किया जाएगा

भारत पहली बार किसी इंसान को चांद पर भेजने वाला है जो इस मंगलयान मिशन से पूरा करेगा अनाउंसमेंट के हिसाब से यह मंगलयान मिशन दिसंबर 2021 को लॉन्च कर दिया जाएगा|

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