क्यूँ हैं महाराणा प्रताप सबसे पसंदीदा शासक

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दोस्तों आज मैं आपको महाराणा प्रताप सिंह के बारे में कुछ इंटरेस्टिंग बातें बताऊंगा....

प्रताप सिंह का जन्म का  जन्म 9 माई 1540 में हुआ इनको हम महाराणा प्रताप सिंह के नाम से जानते हैं, इनका जन्म स्थान मेवार में हुआ था जो कि आज राजस्थान में है यह राजपूत वंश के 13 राजा थे| क्या आप जानते हैं इनका नाम महाराणा प्रताप सिंह कैसे पड़ा यह इकलौते हिंदुस्तान के राजा है जो महल में अपनी जिंदगी ना गुजार के लोगों के बीच में जिंदगी को बिताना पसंद था यही कारण है कि लोग इनको बहुत प्यार करते थे और इनको महाराणा प्रताप सिंह के नाम से बुलाते थे |

Birth place of Maharana Pratap Singh

महाराणा प्रताप सिंह के पिता का नाम उदय सिंह II और माता का नाम जयवंती बाई था जयवंती बाई इन की पहली शिष्य गुरु थी और अपने पुत्र को एक अच्छा योद्धा बनते देखना चाहती थी इसलिए बचपन में ही उनको सारे अस्त्र शास्त्र के ज्ञान दे दिया था| यही कारण था कि जब भी वह अपने दोस्तों के बीच खेलते थे तो उनकी लीडर बन जाती थी और जब भी अपनी उम्र से बड़े लोगों के बीच में बैठते वहां पर भी यह लीडर बन जाते थे यही कारण था कि आगे चलके एक कामयाब योद्धा और राजा बने जो कि कभी किसी दूसरे राज्य से कोई जंग नहीं हारे |

हल्दीघाटी का युद्ध

हल्दीघाटी का युद्ध भारत इतिहास का सबसे खौफनाक युद्ध था यह युद्ध 18 जून 1576 में अकबर और महाराणा प्रताप सिंह के बीच में हुआ था महाराणा प्रताप सिंह ने 15,000 योद्धाओं के साथ अकबर के 80,000 युद्ध का सामना किया था और उनको हारा दिया था यह युद्ध इतना खौफनाक है कि आज बीग उस मिट्टी से सैनिकों के खून निकलते हैं यही नहीं आज भी उस मिट्टी को खोदने पर तलवार, चाकू, खंजर बाहर आ जाती है|
अकबर मेवार को हर हालत में हासिल करना चाहता था यही कारण था कि अकबर और महाराणा प्रताप सिंह के बीच कई लड़ाइयां लड़ी गई अकबर कभी जीता नहीं और महाराणा प्रताप कभी हारे नहीं|
क्या आप जानते हैं  अकबर मेवार हर हालत में क्यों करना चाहता था 1970 में अकबर पूरे हिंदुस्तान को कब्जा कर चुका था और जब भी अकबर हिंदुस्तान के बाहर का सामान हिंदुस्तान में लाता तो मेवाड़ उसकी आरक्षण बन जाता था इस वजह से अकबर मेवाड़ को को हर हाल में जीतना चाहता था|

महाराणा प्रताप सिंह का सबसे प्यारा जानवर जिसको वह अपनी बेटी से भी ज्यादा प्यार करते थे|

Maharana Pratap Singh with Chatak
महाराणा प्रताप सिंह के पास एक नीले कलर का अफगानी घोड़ा था जिसका नाम उन्होंने चेतक रखा था या इकलौता  घोड़ा है जिसके ऊपर बहुत सारी कविताएं लिखी गई है|
महाराणा प्रताप सिंह अपने घोड़े को अपने बेटे से भी ज्यादा प्यार करते थे और उसको हमेशा अपने पास रखते थे|
एक बार महाराणा प्रताप युद्ध में घायल हो गए थे तब चेतक ने अपनी पीठ पर बैठा के दौड़ लगाई और आगे एक हाथी आ गया जिसकी सूंड में तलवार लगी थी चेतक ने छलांग लगाई तभी पिछला पर हाथी के  सूंड में लगी हुई तलवार से कट गया लेकिन चेतक नहीं रुका हूं दौड़ता रहा उसने अपनी टूटी टांग से कई किलोमीटर दौड़ गया और जब चेतक के सामने एक गहरी खाई  आई तो वह उसको छलांग मार के पार कर गया और वही अपना दम तोड़ दिया| चेतक के मरने का गम व भुला नहीं हूं यही कारण था कि वह कई दिनों तक खाना भी नहीं खाए| इससे यह साबित होता है कि महाराणा प्रताप सिंह अपने घोड़े से कितना प्यार है|

रामप्रसाद

Maharana Pratap Singh Elephant Ramparsad
रामप्रसाद महाराणा प्रताप सिंह का दूसरा सबसे लोकप्रिय जानवर जिसने हल्दीघाटी की युद्ध में अकबर के 10 हाथी को मार गिराया था यह महाराणा प्रताप सिंह का दूसरा सबसे ज्यादा शक्तिशाली जानवर है|
अकबर ने रामप्रसाद को साजिश करके बंदी बना लिया था और वह चाहता था कि यह मेरे लिए युद्ध लड़ी लेकिन  रामप्रसाद 28 दिनों तक कुछ नहीं खाया अपने राजा महाराणा प्रताप सिंह की याद  मैं अपनी जान दे दी लेकिन अकबर के सामने नहीं झुका|
जब यह अपना महल तयाग दिए  थे तब यह लोगों के बीच जाकर रहते थे यहां तक कि इतना सादा जीवन बिताते थे कि यह सोने के लिए जमीन का इस्तेमाल करती थी और घास को अपनी चादर बना  ओढ़ लेती थे लोगों के बीच इतना घुल मिल गए थे कि उन्होंने आदिवासी के साथ रहने का फैसला किया|
महाराणा प्रताप सिंह ने आदिवासियों को अस्त्र शास्त्र का ज्ञान देकर उनको योद्धा के काबिल बना दिया था कि कभी भी वह अपने दुश्मनों से लड़ सके और उनको हरा सके|

महाराणा प्रताप सिंह जब भी युद्ध में जाते थे तो वह अपना 80 किलो का कवच 10 किलो के जूते और 70 किलो का भाला साथ में लेकर जाते या उनकी फौलादी हिम्मत का एक नमूना था कि वह इतना ज्यादा वजन उठा लेते थे|

तो  दोस्तों आपको आज की पोस्ट कैसी लगी कमेंट में हमें ज़रूर बताइयेगा, ऐसी ही इंटरेस्टिंग पोस्ट जानने के हमारे ब्लॉग पर आप रेगुलर विजिट करते रहिये।
धन्यवाद।।

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