हाइपरलूप ट्रेन : हवाई जहाज़ से भी तेज़ चलती है ये ट्रेन

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हाइपरलूप ट्रेन : हवाई जहाज़ से भी तेज़ चलती है ये ट्रेन|

 

 What is Hyperloop In Hindi

हाइपरलूप एक ट्यूब में वैक्यूम की मदद से चलने वाली ट्रेन है|  जो कि एक एरोप्लेन  से  तेजी से चलने की क्षमता  रखती है| इसकी स्पीड 12000 से 1400 किलोमीटर प्रति घंटा  की दर से चल सकती है| यानी कि लखनऊ से दिल्ली तक का सफर सिर्फ 1 घंटे में  तय कर सकती है जो कि यह काफी ज्यादा तेज  होगा ऐसे तो लखनऊ से दिल्ली तक जाने में 12 घंटा लग जाते हैं लेकिन हाइपरलूप ट्रेन की मदद से सिर्फ 1 घंटे  में पहुंचा जा सकता है|

अब बात करते हैं हाइपरलूप ट्रेन इतनी स्पीड  कैसे प्राप्त करता है| इसको जानने के लिए हमको इसके पीछे लगे हुए प्रिंसिपल को जानना होगा पहले तो  मैग्नेटिक फील्ड कि मदद से स्टार्ट किया जाता है और फिर ट्यूब में बाहर की तरह लगे हुए वेक्यूम की मदद से प्रेशर काफी कम कर दिया जाता है|

जिसकी  वजह से उसकी स्पीड और भी बढ़ जाती है जब यह अपनी स्पीड आधी से ज्यादा स्पीड प्राप्त कर लेता है तब ट्रेन में लगे हुए मोटर जो कि सामने होता है वह सामने से आ रहे हवा के प्रेशर को खींचकर नीचे भेज देता है जिसकी वजह से ट्रेन हवा में थोड़ा लिफ्ट हो जाती है और यह अपनी 1400 किलोमीट प्रति घंटा की स्पीड प्राप्त कर लेता है|

HyperLoop, HyperLoop train

आइए जानते हैं हाइपरलूप का आईडिया कहां से आया|

 

HyperLoop train
 एलोन मस्क जो कि टेस्ला कंपनी के प्रेसिडेंट है और स्पेस एक्स के भी यह आइडिया उनको सबसे पहले आया 2011 में तभी व्हाइट पेपर में पूरी डिजाइन  और डिटेलिंग डॉल के इस प्रोजेक्ट का आगाज   कर दिया था और बताया कि इस प्रोजेक्ट को टेस्ला और स्पेसएक्स दोनों कंपनी मिलकर इस प्रोजेक्ट के ऊपर काम करेंगी एलोन मस्क  को यह आइडिया 1910 में रॉबर्ट गोडार्ड से आया था|

1910 में रॉबर्ट गोडार्ड ने वैक्यूम टनल के अंदर मैग्नेट पर एक फ्लोटिंग ट्रेन तैयार की जो 20 मिनट में लखनऊ से वाराणसी के बीच की दूरी को तय करते हुए 410km/h तक पहुंच सकती थी। जा प्रोजेक्ट 1910 में कामयाब नहीं हो पाया था इसलिए एलोन मस्क  ने इस प्रोजेक्ट को बड़े पैमाने पर करने का सोचा अब देखना काफी दिलचस्प होगा कि जब प्रोजेक्ट कब बनकर तैयार होता है और कितना कारीगर होता है|

       एलोन मस्क के इस प्रोजेक्ट की कुल  कीमत 6 बिलियन डॉलर (₹41,506 crore ) है|

हाइपरलूप का यह प्रोजेक्ट ओपन सोर्स प्रोजेक्ट है जिसका मतलब है कि इसको कोई भी कंपनी बना सकती है इसके चलते दो कंपनियों ने काफी ज्यादा काम कर लिया है और अपने मुकाम तक लगभग पहुंच गए हैं जिनमें से एक  एलोन मस्क  की कंपनी है और दूसरी वर्जिन हाइपरलूप वन है|

वर्जिन हाइपरलूप वन

 

HyperLoop train


वर्जि हाइपरलूप वन जिसे पहले हाइपरलूप वन के नाम से जाना जाता था, एक अमेरिकी ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी कंपनी है जो हाइपरलूप नामक हाई-स्पीड टेक्नोलॉजी कॉन्सेप्ट को कमर्शियल करने का काम करती है। कंपनी का गठन 2014 में किया गया था, और 2017 में पुनर्गठित और बदला गया।

हाइपरलूप सिस्टम का उद्देश्य यात्रियों और / या कार्गो को हवाई यात्रा की लागत के एक अंश पर एयरलाइन की गति पर ले जाना है। हाइपरलूप परिवहन की अवधारणा पहली बार एलोन मस्क ने अगस्त 2013 में शुरू की थी।

एलोन मस्क   की स्पेस एक्स और  टेस्ला के बाद यह दूसरी कंपनी है जो इस बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और काफी सफल भी रही है इसमें कुल 5 देशों में अपना प्रोजेक्ट को बनाने का सोचा है उनमें से अपना भारत भी है|

कौन कौन से वोह देश है जिनमे यह प्रोजेक्ट निर्माण होना ह|
 
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205 देशों में से सिर्फ पांच देशों को चुना गया है जिसमें यह हाइपरलूप प्रोजेक्ट  का निर्माण होना है| ऐसे में भारत का नाम होने पर हमें काफी गर्व होना चाहिए क्योंकि यह सिर्फ हमारे लिए नहीं हमारे भविष्य के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक होगा|
इसका पहला प्रोजेक्ट मुंबई से लेकर चेन्नई तक का है और दूसरे चरण में बेंगलुरु से चेन्नई तक का है अब देखना काफी रोचक होगा कि इस प्रोजेक्ट को कितनी जल्दी भारत में बना लिया जाता है और हमें इस प्रोजेक्ट यानी हाइपरलूप ट्रेन में बैठने का सौभाग्य कब प्राप्त होगा|
क्या इस हाइपरलूप ट्रेन में सफर करना सेफ होगा|
 
जब यह हाइपरलूप ट्रेन 1400 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलने वाली है तो मन में सवाल उठना लाजमी है कि क्या इस में सफर करना सेफ होगा| तो हम आपको बता दे अभी तक जितने रिसर्च हुए हैं उसमें कोई भी ऐसी बात नहीं पाई गई है| जिससे इस सफर में बैठने में परेशानी हो या इस सफर को आरामदायक ना बनाया जा सके ऐसी कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है|

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