अगर आपकी मौत MARS पर हो तो क्या होगा ??

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हेलो दोस्तों आपका स्वागत है बहुत फ्रेश और कमाल पोस्ट में दोस्तों आज तक इस प्लेनेट पर और इसी प्लेनेट से कुछ सौ किलोमीटर दूर स्पेस के अलावा इंसानों की मौत और कहीं नहीं हुई है ना ही किसी ग्रह पर कोई इंसान मरा है और मरेगा भी कैसे कैसे चांद के अलावा मनुष्य किसी और ग्रह पर गया ही नहीं है खैर फ्यूचर में ऐसा होना तय है कि बहुत से इंसान मार्स पर जाएंगे तो कुछ है रहने के दौरान मौत भी होगी क्योंकि हर किसी को मौत का मजा चखना है चाहे वह अर्थ पर हो या फिर मार्स पर पर हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता तो दोस्तों आइए जानते हैं कि अगर किसी की मौत मंगल ग्रह पर होगी तो क्या होगा ।

कभी ना कभी कोई ना कोई मार्स पर तो जरूर मरेगा जब वह कभी आने वाले समय में इंसानी कॉलोनी बन जाएंगे तब तब को इंसान मार्स पर मरता है तो इसे मार्स पर दफन किया जाएगा पर दफन किया जाएगा और इंटरनेशनल कानूनों के मुताबिक क्योंकि दूसरे प्लेनेट पर प्रदूषण फैलाना यूनाइटेड नेशन चार्ट के अनुसार गैरकानूनी के अनुसार गैरकानूनी है और हम इंसानों की बॉडी बहुत सारे दुसित सूक्ष्म जीवों से बनी होती है तो अगर कोई मार्च पर मरेगा तो उसके सभी माइक्रोब्स मार्स के एनवायरमेंट में एनवायरमेंट में में  सरवाइव नहीं कर पाएंगे और मारे जाएंगे या फिर बच जाएंगे मगर वह मगर वह बचते भी हैं तभी बॉडी में पनप नहीं पाएंगे और डेड बॉडी को सैकड़ों सालों तक कुछ होगा कुछ होगा सालों तक कुछ होगा भी नहीं तो आखिर मार्स पर मरने के बाद डेड बॉडी का क्या किया जाएगा एक तरीका है यह तरीका स्पेस में यूज करने के लिए बनाया गया है यह तरीका काफी अजीब है इसे बॉडी बैक कहते हैं यह नासा ने 1 स्वीडिश कंपनी Promessa  से कांटेक्ट किया था इस कंपनी की खास बात या खास बात या है लोगों का अंतिम संस्कार एनवायरमेंट फ्रेंडली तरीके से करना अपनी इन्हीं टेक्निक टेक्निक की वजह से एकंपनी जानी जाती है इस कंपनी ने एक तरीका बनाया बॉडी बैक बनाया बॉडी बैक ऐसा आज तक किसी इंसान की बॉडी के साथ नहीं किया गया बहुत ही अजीब तरीका है इसमें मार्स पर मरे शख्स की बॉडी को एक वेदर प्रूफ बैग में रखा जाएगा जाएगा फिर इसे ठंडा करके लिक्विड नाइट्रोजन में छोड़ दिया जाएगा यह बॉडी को बहुत ज्यादा जमा कर रख देता है और उसके बाद एक मशीन उस लाश को तब तक हिलाती रहेगी रहेगी जब तक वह लाश  पाउडर में बन जाए यह काफी डरावना तरीका है लेकिन मार्स पर मरे इंसानों के लिए यह तरीका ज्यादा सही है लेकिन लिक्विड नाइट्रोजन बैक्टीरिया को मारती को मारती नहीं है बल्कि उसे बढ़ने से रोक देती है इसलिए इंसान की बॉडी पाउडर के रूप में हमेशा के लिए सुरक्षित रह जाएगी तो इस तरीके से मार्स पर पोलूशन नहीं होगा असल में मार्च पर मरे हुए इंसान को पाउडर में जरूर बदलना पड़ता है क्योंकि यह मार्च है मार्च है टाइटन या वाकांडा वाकांडा नहीं जहां पर बॉडी एक चुटकी में पाउडर बन जाती है लेकिन अगर यह ऑप्शन ना मौजूद हुआ हुआ हुआ तो किसी का स्पेस सूट किसी वजह से टूट जाए तो वह मार्स के वातावरण में डिस्पोज हो जाए तो मार्स पर उसकी पर उसकी सड़ेगी नहीं क्योंकि उसकी बॉडी के सारे बैक्टीरिया मर जाएंगे जाएंगे जाएंगे और उसकी बॉडी डीकंपोज नहीं होगी साइंटिस्ट मार्च के जैसे वातावरण में यानी कि अर्थ पर है


बॉडी इस पर पर रिसर्च कर रहे हैं चिली देश के अडगामा में यह लोग रिसर्च लोग रिसर्च रहे हैं अडगामा डेजर्ट धरती की सूखी जगहों में से एक है में से एक है और समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर भी है जितना आप ऊंचाई पर होंगे उतने ही पतली ड्राई और ठंडी हवा होगी यह वातावरण कुछ मार्स के वातावरण जैसे मिलता जुलता है 200 साल पहले अडगामा किंगका एंपायर का हिस्सा था और तब उन लोगों में एक अजीब और घटिया कुप्रथा प्रचलित थी जिसका नाम था कपा-कोचा और यह लोग इसमें बच्चों की बली देते थे लेकिन अब उन बच्चों की बॉडी साइंटिस्ट को उनकी रिसर्च करने में सहायता कर रही हैं यानी वह यह कुप्रथा के सैकड़ों यह कुप्रथा के सैकड़ों साल बाद आज के इंसान का मार्स पर जाने का रास्ता आसान कर रहे हैं क्योंकि अडगामा डेजर्ट इतना ठंडा था कि वहां पर बैक्टीरिया को बॉडी में पनअपने का मौका नहीं मिला और वह बॉडी नेचुरल ममी बन गई इजिप्ट वालों ने बहुत ही मेहनत से ममी बनवाई थी और अडगामा में ये ममी फ्री में ही बन गई और उन बच्चों की लाश आज भी सही सलामत है


 तो यही कार्य मार्स पर भी होगा मार्स पर बैक्टीरिया पनप नहीं पाएंगे पनप नहीं पाएंगे या फिर बहुत ही धीमे बनेंगे और उस लाश को पाउडर बनाकर अगर खत्म पाउडर बनाकर अगर खत्म नहीं किया गया तो उसे नष्ट होने में सदियां लग जाएंगी लेकिन अगर यही मार्च के एक इक्वेटर यानी भूमध्य रेखा पर हुआ हो तो वहां अगर किसी इंसान की लाश रखी जाए तो तो टेंपरेचर वहां थोड़ा सही है यानी 20 डिग्री सेल्सियस है डिग्री सेल्सियस है इसलिए बॉडी को बैक्टीरिया डीकंपोज करना शुरू कर देंगे लेकिन थोड़ी देर के लिए क्योंकि मार्स का हाई रेडिएशन बैक्टीरिया को जिंदा रहने नहीं देंगे यहां पर अल्ट्रावायलेट रेज को रोकने के लिए हमारी अर्थ की तरह कोई ओजोन लेयर नहीं मौजूद है इसलिए अल्ट्रावायलेट किरणें किसी रोक-टोक के मार्स पर आती रहती हैं और वह सूक्ष्म जीवों को जिंदा रहने नहीं देंगी इसलिए अगर किसी की मौत मार्स पर होती है तो उसकी बॉडी को किसी स्पेशल तरीके से नष्ट या उसका पाउडर नहीं बनाया गया तो उसकी बॉडी हजारों साल तक सुरक्षित रह जाएगी तो दोस्तों अगर मार्स पर इंसानी बस्ती बसाना चाहता है तो यह बात सोचनी जरूरी है कि मार्च पर मरने के बाद बॉडी का क्या होगा वरना वहां पर बॉडी का ढेर लगता चला जाएगा चला जाएगा लगता चला जाएगा चला जाएगा आज के इस पोस्ट में इतना है है पोस्ट में इतना है ………!!!!!!!




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